
रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प का त्योहार नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भारतीय संस्कृति में भाईचारे और पारिवारिक संबंधों की गहराई को दर्शाती हैं। ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा भगवान विष्णु, दानवीर राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा बलि भगवान विष्णु के परम भक्त और महान दानी थे। जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी, तो बलि ने अपना वचन निभाते हुए तीनों लोक भगवान को अर्पित कर दिए। इसके बाद भगवान विष्णु राजा बलि की भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न हुए और उसकी रक्षा के लिए उसके साथ रहने लगे।
कहा जाता है कि भगवान विष्णु के लंबे समय तक अपने धाम न लौटने से माता लक्ष्मी चिंतित हुईं। तब उन्होंने राजा बलि को अपना भाई बनाने का निश्चय किया। श्रावण पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उसे अपना भाई माना। इसके बदले राजा बलि ने माता लक्ष्मी से उनकी इच्छा पूछी।
मान्यता है कि माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को उनके साथ वैकुंठ वापस भेजने का आग्रह किया। राजा बलि ने बहन के स्नेह और सम्मान को स्वीकार करते हुए भगवान विष्णु को उनके साथ जाने की अनुमति दे दी। इस प्रकार राखी का यह प्रसंग त्याग, प्रेम, वचन और पारिवारिक संबंधों की महत्ता का प्रतीक बन गया।
Reporter: Rajesh Agrawal
